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YouTube Likeness Detection Tool: अब Deepfake वीडियो बनाना होगा मुश्किल, AI से पहचान कर तुरंत हटेगा फर्जी कंटेंट

YouTube ने Deepfake वीडियो के बढ़ते खतरे को देखते हुए नया YouTube Likeness Detection Tool शुरू किया है। यह AI आधारित फीचर किसी व्यक्ति की आवाज़ और चेहरे की नकली कॉपी पहचानने में मदद करेगा। फिलहाल इसे पत्रकारों, सरकारी अधिकारियों और पॉलिटिकल लीडर्स के लिए पायलट प्रोग्राम के तहत उपलब्ध कराया गया है।

YouTube Likeness Detection Tool
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YouTube Likeness Detection Tool: आज के समय में इंटरनेट पर वीडियो देखना हमारी रोज़मर्रा की आदत बन चुकी है। लेकिन इसी दुनिया में एक नई समस्या भी तेजी से बढ़ रही है Deepfake वीडियो Artificial Intelligence की मदद से अब किसी भी व्यक्ति की आवाज़ और चेहरा कॉपी करके नकली वीडियो बनाना

पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। ऐसे वीडियो अक्सर गलत जानकारी फैलाते हैं और लोगों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाते हैं। इसी खतरे को देखते हुए YouTube ने एक खास सुरक्षा फीचर YouTube Likeness Detection Tool को और ज्यादा यूजर्स के लिए उपलब्ध कराने का फैसला किया है।

यह YouTube Identity Protection Feature खास तौर पर उन लोगों के लिए बनाया गया है जिनकी पहचान का गलत इस्तेमाल करके AI Deepfake Videos बनाए जाते हैं।

YouTube Likeness Detection Tool क्या है और क्यों जरूरी है

Deepfake तकनीक का इस्तेमाल पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ा है। Artificial Intelligence के जरिए किसी व्यक्ति का चेहरा और आवाज़ बिल्कुल असली जैसा बनाकर वीडियो तैयार किया जा सकता है। कई बार इन वीडियो का इस्तेमाल अफवाह फैलाने या लोगों को गुमराह करने के लिए किया जाता है।

इसी समस्या को हल करने के लिए YouTube Deepfake Detection Tool तैयार किया गया है। इस फीचर को पहली बार अक्टूबर 2025 में लॉन्च किया गया था। इसका मकसद ऐसे वीडियो को पहचानना है जिनमें किसी व्यक्ति की अनुमति के बिना उसकी आवाज़ या चेहरा AI की मदद से इस्तेमाल किया गया हो।

YouTube Likeness Detection Tool
YouTube Likeness Detection Tool

यह टूल खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है जिनकी सार्वजनिक पहचान है। अगर कोई व्यक्ति उनकी नकली वीडियो बनाकर इंटरनेट पर फैलाता है, तो वे इस टूल की मदद से उसे जल्दी पहचान सकते हैं और हटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

आज के डिजिटल दौर में यह फीचर इसलिए भी जरूरी है क्योंकि गलत वीडियो से सामाजिक तनाव और गलत जानकारी फैलने का खतरा काफी बढ़ जाता है।

अब पत्रकारों और नेताओं को भी मिलेगा YouTube Identity Protection Feature

YouTube ने अपने आधिकारिक ब्लॉग में बताया है कि अब इस YouTube Likeness Detection Tool for Journalists को और ज्यादा लोगों के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। इसमें पत्रकार, सरकारी अधिकारी और राजनीतिक नेता शामिल हैं।

इन लोगों का समाज में काफी प्रभाव होता है। अगर इनके नाम या चेहरे का इस्तेमाल करके कोई Deepfake वीडियो बनाया जाता है, तो उससे गलत जानकारी तेजी से फैल सकती है। इसी कारण YouTube ने फैसला किया है कि इन प्रभावशाली लोगों को भी AI Deepfake Protection YouTube सिस्टम का हिस्सा बनाया जाए।

इससे वे अपने नाम और पहचान का गलत इस्तेमाल करने वाले वीडियो को रिपोर्ट कर सकते हैं। फिलहाल यह फीचर पायलट प्रोग्राम के तहत सीमित यूजर्स के लिए उपलब्ध है। लेकिन कंपनी का कहना है कि आने वाले महीनों में इसे और अधिक यूजर्स के लिए शुरू किया जा सकता है।

YouTube Likeness Detection Tool कैसे काम करता है

इस टूल का इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले योग्य यूजर्स को एनरोलमेंट प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसमें उनकी पहचान की पुष्टि की जाती है। एनरोलमेंट के दौरान यूजर्स को अपना फोटो आईडी जमा करना होता है। इसके साथ उन्हें अपने चेहरे का एक छोटा वीडियो रिकॉर्ड करके भेजना होता है।

YouTube Likeness Detection Tool
YouTube Likeness Detection Tool

यह प्रक्रिया Identity Verification का हिस्सा होती है। इन जानकारियों की मदद से YouTube सिस्टम व्यक्ति के चेहरे और आवाज़ की पहचान को सुरक्षित तरीके से दर्ज करता है। इसके बाद YouTube की टीम आवेदन की जांच करती है।

अगर सब कुछ सही पाया जाता है तो कंपनी ईमेल के जरिए पुष्टि भेजती है कि यूजर का सेटअप पूरा हो गया है। इसके बाद वह व्यक्ति अपने नाम या चेहरे का गलत इस्तेमाल करने वाले Deepfake वीडियो को हटाने का अनुरोध कर सकता है।

डेटा सुरक्षा को लेकर YouTube ने क्या कहा

डेटा सुरक्षा को लेकर कई लोगों के मन में सवाल होते हैं। इस पर YouTube ने साफ किया है कि वेरिफिकेशन के दौरान जमा किया गया डेटा सिर्फ पहचान सत्यापन के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। कंपनी का कहना है कि यह जानकारी Google के AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए इस्तेमाल नहीं की जाएगी।

यानी यूजर्स की निजी जानकारी AI प्रशिक्षण का हिस्सा नहीं बनेगी। YouTube के अनुसार यह डेटा कंपनी के सुरक्षित इंटरनल डेटाबेस में रखा जाएगा। आखिरी साइन-इन के बाद इसे अधिकतम तीन साल तक स्टोर किया जा सकता है।

इसके बाद इसे कंपनी की प्राइवेसी पॉलिसी के अनुसार संभाला जाएगा। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में AI और Deepfake Detection Technology इंटरनेट सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।

Disclaimer: यह लेख उपलब्ध समाचार जानकारी और सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से है। किसी भी आधिकारिक अपडेट या फीचर से संबंधित अंतिम जानकारी के लिए YouTube की आधिकारिक घोषणा या वेबसाइट देखना बेहतर होगा।

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Prem Sagar Kumar

एक डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और ब्लॉगर हूँ , जो Samachar Fast वेबसाइट के संस्थापक हूँ । मुझे टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, सरकारी योजनाएं और ट्रेंडिंग खबरों पर लिखना पसंद है। हमारा उद्देश्य पाठकों तक आसान भाषा में सही और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है। Samachar Fast के माध्यम से हम हर दिन नई और भरोसेमंद जानकारी साझा करते हैं, ताकि पाठकों को देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें और अपडेट सबसे पहले मिल सकें।

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